कुछ कदम वो चले
कुछ कदम हम,
जाने कैसे अचानक
कोई एक कदम पीछे रहे गया ,
प्यार की डोर में एक
सिलवटे का धागा रहे गया ,
आज भी याद आते है जब वो कदम
तो मुस्कुरा जाते है हम ,
दूरिया आज है तो भी क्या
वो प्यार के दो लम्हे भी
किसी से नही थे कम .......................