चुनाव - 2014
सरकार भीड़ से नही एक आदमी से बनती है,अगर कही हज़ार लोग खड़े है तो वो सरकार नही हैं , सरकार वो कहलाएगी, जहाँ एक आदमी अपने विचार प्रकट कर राह दिखा रहा होगा और हज़ार लोग उसे सुन रहे होंगे।
भारत में चल रही राजनीति आज खिचड़ी जैसी प्रतीत हो रही है, खासतौर पर 2014 के चुनाव। एक तरफ राहुल ग़ांधी है ( कांग्रेस सरकार ) जो पीछे 10 साल से शासन कर रही है, समझ नही आता वो सरकार चला रहे है या पैसा और समय बर्बाद कर रहे है ,.दूसरी और है मोदी सरकार (भाजपा ) - एक पूर्ण हिंदुनिष्ठ व्यक्ति। जिसके बारे में लोगों की राय है की अगर उनकी सरकार आई तो भारत भ्र्ष्टाचार मुक्त हो या न हो , मुसलमान मुक्त जरूर हो जायेगा। और तीसरी तरफ है अरविन्द केजरीवाल,(आम आदमी पार्टी ), वो खुद को आम आदमी तो कहते है लकिन वो खुद कितने आम आदमी है ये कोई नही जनता , वे दिल्ली के,मुख्यमंत्री बने और 49दिनों में ही सरकार छोड़ उठ गये। ऐसी है हमारे आज के नेताओ की पहचान।
ये किसी राजनीति चल रही है हमारे देश में, हिन्दु परेशान है कांग्रेस की महंगाई और भर्ष्टाचार से और मुसलमान डर रहे हैं मोदी की सरकार से, और बची आम आदमी पार्टी तो उसको तो खुद आम आदमी ही नही जान पा रहा। हमारा देश भारत ऐसा तो नही था।
आज हमे किसी सरकार की नही, सच्चे इंसान की जरूरत है जो हम खुद है। हम से ही शुरू होता है ये देश और हम पर ही खत्म। किसी सरकार की अच्छाई या बुराई दखने से अच्छा है हम स्वयं को और अपनी विचारधाराओं को बदले,तभी ये देश बदलेगा।
आम आदमी मै हुँ ,
आम आदमी तू है ,
सच्चा मै हु ,
अच्छा तू है ,
जरूरत है बस एक राह की
मुसाफ़िर ही मै हुँ
और मुसाफ़िर ही तू है।
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