Tuesday, 21 October 2014

कुछ बाते मेरी भी सुनो

1.
धुँआ अधजली छान से ही निकलता है ,
चाहे फिर वो
प्यार की हो या नफरत की ...............

2.
कितना कुछ कहना चाहते है ये लब्ज तुझे ,
लेकिन चेहरा तेरा मेरे लफ्ज़ ही बदल देता है ........

3.
गिले -शिकवे मिटा देना तुम भी 
बहुत ख़ुशी होती हैं किसी को अपना पाकर,
अभी जाना मैने ........

4.
लोग कहते है तुम्हे बोलना नही आता 
क्युकी तुम सुनती नही ,
अब उन्हें कौन बताये 
हर किसी की बातें हम सुनते नही ,
और जिसकी सुनते है 
उसकी बातें सबको बताते नही .........

5.
आज फिर मन करा की मर जाऊ
बहुत जी चुकी जिंदगी ,
आख़िर क्या फलसफा इसका निकला
जरा उस खुदा से पहुंच कर तो आउ ..............
6.
खाना खाना सिर्फ एक काम ही तो है ,
न जाने क्यों लोग ,
इतना वक़्त बर्बाद करते है 
खाना खाने और बनाने में...........

.7
जिस्म का हर घाव तो भर जाता है ,
ग़र बहुत मुश्किल होता है
फिर से प्यार करना सिख पाना ...............

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