क्या आर्टिफिशल नही
आज दुनिया में ,
चमकते नाख़ून से आज दुनिया में ,
तन्हाई की इस भीड़ में
हम तो आज भी वही है ,
बस कमी हैं तो तेरी
उन नजरों की ,
जो अक्सर ढूढ़ा करती थी हमे .............
क्यों कुछ बातें हम लड़कियां
सोच कर ही रहे जाती है ,
मन तो करा था, वहीं सिर फोड़
ज़मीन में गाड़ देती उसे ........
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